एक बेटा था, जो हमेशा सोचता था कि उसके माता-पिता उसे समझते नहीं हैं। उसे लगता था कि वे बहुत सख्त हैं और उसकी आजादी छीन रहे हैं।
समय बीतता गया और वह बड़ा होकर नौकरी करने लगा। अब उसे खुद जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ा।
एक दिन जब वह थका हुआ घर आया, तो उसे एहसास हुआ कि उसके माता-पिता भी रोज ऐसे ही थकते होंगे, लेकिन फिर भी उसके लिए मुस्कुराते थे।
उसे समझ में आया कि उनकी सख्ती के पीछे प्यार और चिंता थी। उस दिन उसने अपने माता-पिता को call किया और सिर्फ इतना कहा, “Thank You।”
उसके माता-पिता की आवाज में जो खुशी थी, वह उसने पहले कभी महसूस नहीं की थी।
तभी उसे एहसास हुआ कि माता-पिता का प्यार समझने के लिए हमें खुद जिम्मेदार बनना पड़ता है।
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